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शिव जयन्ती (शिवरात्रि) विशेष कविता

आज साल का सबसे बड़ा दिन, अर्थात महा शिवरात्रि का पर्व है। आज का दिवस शिव बाबा (परमपिता परमात्मा) के अवतरण का यादगार है। इसलिए हम ब्राह्मण आत्माओ के लिए आज का दिन अति विशेष है।


तो आज विशेष शिवरात्रि पर लिखी गयी कविता आप सभी ब्राह्मणो को सज़ा कर रहे है। यह कविता बी.के.मुकेश मोदी (राजेस्थान) ने लिखी है।

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Tip: इस शिवरात्रि कविता के PDF version को आप डाउनलोड व् प्रिंट कर सकते है।

Shivratri Paramatma Shiv ka Avtaran

शिव जयन्ती

शुभ शगुन है जग के लिए शिव पिता का आना

मीठे बच्चे कहकर हमको पवित्र उनका बनाना


सोचा नहीं था ऐसा कि खुद भगवान ही आयेंगे

राजयोग सिखाकर हमको शूल से फूल बनाएंगे


सारे बन्धन छूट गये बांधी प्यार की उससे डोर

बतियाते रहते उसके संग सुबह शाम और भोर


उसकी श्रीमत पर चलने का कदम बढ़ाया एक

मदद करने के लिये उसने बढ़ाये कदम अनेक


गुणगान करें क्या उसका वो सागर है प्यार का

हम बच्चों से करवाता वो परिवर्तन संसार का


घोर काली हो जाती जब अज्ञानकाल की रात

बाप तब ही आते हैं करने बच्चों से मुलाकात


आत्मभान जगाकर हम सबको पावन बनाते

अपनी पलकों पर बिठाकर वे घर हमें ले जाते


कहना मानने वाले ही दिलतख्त बाप का पाते

अवज्ञा करने वाले शिव के बाराती ही रह जाते


घर ले जाने आये शिवबाबा पावन हमें बनाकर

निर्विकारी बन जाओ बच्चों पूरी शक्ति लगाकर

ॐ शांति


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